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इस्मत चुग़ताई

इस्मत चुग़ताई
इस्मत चुग़ताई

लेखक: अब्दुल गफ़्फ़ार

इस्मत चुग़ताई मेरी बेहद पसंदीदा उर्दू लेखिका रही हैं. आज उनका जन्म दिवस है. उन्होंने अफ़साने, कहानियों और उपन्यास लेखन में बड़ा नाम कमाया. राशीदा जहां, वाजिदा तबस्सुम और क़ुरात-उल-ऐन हैदर की तरह इस्मत चुग़ताई ने भी उर्दू साहित्य में इंक़लाब बरपा किया.
इस्मत चुग़ताई ने निम्न मध्यवर्गीय मुस्लिम तबक़े की दबी-कुचली सकुचाई और कुम्हलाई लड़कियों की मनोदशा को अपनी कहानियों व उपन्यासों में पूरी सच्चाई से बयान किया है. उनका पहला उपन्यास ‘गेंदा’ है। इस उपन्यास की मुख्य पात्र ‘गेंदा’ है जो बहुत ग़रीब लड़की है। गेंदा की बचपन में ही शादी हो जाती है और वह विधवा हो जाती है. डेढ़ साल बाद जब गेंदा की सहेली उससे मिलने आती है तो गेंदा की गोद में एक बच्चा होता है.

लिहाफ़


1934 में, उन्होंने ‘लिहाफ़’ नामक एक कहानी लिखी. लिहाफ़ के बारे में इस्मत चुग़ताई अपनी आत्मकथा में लिखती हैं:
“किसी ने भी उस पर विचार नहीं किया जो मैंने लिहाफ़ से पहले और बाद में लिखा. लिहाफ़ का लेबल अभी भी मेरे व्यक्तित्व से जुड़ा हुआ है. लिहाफ़ मेरा आकर्षण बन गई है. मैं जो कुछ भी लिखती हूँ वह लिहाफ़ की परतों में दब जाती है। लिहाफ़ ने मुझे बड़े जूते खिलवाए.”
“चौथी का जोड़ा” इस्मत चुग़ताई का एक नुमाईंदा अफ़साना है।

यह एक ग़रीब विधवा के परिवार की कहानी है. दो बेटियों की मां घर पर काम कर अपना और अपनी बेटियों का भरण पोषण करती है. कुबरा बड़ी लड़की है जो उम्रदराज़ है, जबकि छोटी बेटी वहीदा है। अपनी बड़ी बेटी कुबरा की शादी की इच्छा को दिल से लगाते हुए मां बार-बार चौथी का जोड़ा बनाती है और जब वह जोड़ा पुराना हो जाता है, तो उसे खोलकर फिर से नया बनाती है।

लोकप्रिय उपन्यास


उनके लोकप्रिय उपन्यासों में ज़िद्दी, मासूमा, टेढ़ी लकीर आदि शामिल हैं. टेढ़ी लकीर का अंग्रेज़ी में अनुवाद भी किया गया था.
इस्मत आपा ने फिल्मों के लिए भी लिखा।1948 में फ़िल्म ‘ज़िद्दी’ इस्मत चुग़ताई द्वारा लिखी गई थी. 1950 में, उन्होंने फिल्म ‘आरज़ू’ के लिए कथा पटकथा एंव संवाद लिखे. 1958 में ‘सोने की चिड़िया’ फिल्म की कहानी लिखी. 1974 में भारत के बंटवारे पर आधारित फिल्म ‘गर्म हुआ’ इस्मत चुग़ताई की कहानी पर आधारित थी.

इस फिल्म के डायलॉग और स्क्रीनप्ले कैफ़ी आज़मी और शमा ज़ैदी ने लिखे थे. इसके अलावा, इस्मत चुग़ताई ने फिल्म ‘जुनून’ और ‘महफ़िल’ के संवाद भी लिखे. उन्होंने “जुनून” में एक छोटी सी भूमिका भी निभाई।
इस्मत चुग़ताई को 1976 में “पद्म श्री” . और 1984 में ‘टेढ़ी लकीर’ के लिए “ग़ालिब” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 1975 में उन्हें फिल्म “गर्म हवा” के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानी का “फिल्मफेयर” पुरस्कार दिया गया(कैफ़ी आज़मी सह-कथाकार थे).

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