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क्या है ईशान कोण?

ईशान कोण
ईशान कोण

शास्त्रों में घर को मंदिर कहा गया है। वास्तुशास्त्र के अनुसार घर के हर कोने में अलग-अलग देवताओं का वास होता है जो घर में निवास करने वालों के जीवन में सफलता, स्वास्थ्य, सुख-शांति और धन-ऐश्वर्य के कारक होते हैं। लेकिन इन स्थिति देवताओं से जीवन में आशीर्वाद मिल सके इसके लिए यह जरूरी है कि घर की बनावट तथा रहन-सहन देवताओं की प्रसन्नता के अनुकूल हो। इसके के वास्तुशास्त्र में अनेक नियमों का प्रावधान है।

ईशान कोण में रखा वजनदार वस्तु जीवन को कलहमय बना सकता है

आज हम बात करेंगे घर मे ईशान कोण की। घर के उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है।इस दिशा का स्वामी ‘रूद्र’ यानि भगवान शिव है और प्रतिनिधि ग्रह ‘बृहस्पति’ है। यह घर के आध्यात्मिक जीवन को नियंत्रित करता है। घर के ईशान कोण को देखकर यहां रहनेवालों की मानसिकता, विवेक और बुद्धि को समझा जा सकता है।

अगर ईशान कोण वास्तु दोष से पीड़ित है तो घर के निवासियों का जीवन कलह और बीमारियों से घिर जाता है। यह दिशा विवेक, धैर्य, ज्ञान, बुद्धि आदि प्रदान करती है।  घर में इस दिशा को पूरी तरह शुद्ध व पवित्र रखा जाना चाहिए तथा यहां कोई भारी या वजनदार समान भी नहीं रखना चाहिए। अगर ईशान कोण वास्तु दोष से पीड़ित है तो यहां रहने वाले को संतान में बेटी ही अधिक हो सकती है। सदस्यों मेंं आपसी सामंजस्य की कमी बनी रहती है।


★घर के इस दिशा को पूजा स्थल में बदल दें। 
★यहां भगवान की तस्वीरें जरूर होनी चाहिए। 
★यहां कोई वजनदार समान जैसे पलंग, अलमारी, कोठी नहीं होना चाहिए। 
★इस दिशा में वाहन न लगाएं। 
★इस दिशा में तेल, पेट्रोल-डीज़ल आदि का संचयन न करें।
★यहां कुंआ, बोरिंग आदि जल स्रोत्र रखना शुभकारी होता है।

★घर का ईशानकोण बनावट में दक्षिण-पश्चिम कोने से नीचा होना चाहिए।  इतना ही नहीं घर का ईशान घर के सभी कोनों में तुलनात्मक रूप से नीचा होना चाहिए।

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