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हसीब सोज़ की ग़ज़लें

Read Hindi Poetry and Hindi Kavita on various topics. In this selection of poems, you can read Haseev Soz Ki Shairi. It contains the topics of Hindi Poetry or Whatsapp Status Poetry and Hindi Quotes Poetry TikTok Status.

haseeb soz
haseeb soz

रोज़ कुर्ते ये कलफ़-दार कहाँ से लाऊँ_
तेरे मतलब का मै किरदार कहाँ से लाऊँ
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दिन निकलता है तो सौ काम निकल आते हैं,
ऐ ख़ुदा इतने मददगार_ कहाँ से लाऊँ

सर बुलन्दओं के लिये सर भी कटा दूं लेकिन
सर फिरों के लिये दस्तार कहाँ से लाऊँ

सोने चांदी का ख़रीदार नहीं है कोई
यार मिटटी का ख़रीदार कहाँ से लाऊँ

वो तिरा शहर था जिसमें तिरी चल जाती थी
हर जगह तेरे नमक ख्वार कहाँ से लाऊँ

गज़ल

आख़री दाव में उसने बड़ी हुश्यारी की
झूटी अफ़वाह उड़ा दी मिरी बीमारी की

इक गुनाहगार फ़रिश्तों की जगह बैठ गया
बरसरे बज़्म बहुत खूब अदाकारी की

ख़ुद कुंआ चल के गया है अभी प्यासे की तरफ़
इन्तेहा हो गई अए दोस्त तरफ़दारी की

इससे बढ़ कर कोई सम्मान भला क्या होगा
बे ज़मीं हो के कई साल ज़मींदारी की

अब यही नाम,यही ज़ात, यही मज़हब है
ये जो इक मुहर लगी है मिरे नादारी की

गज़ल

कांच के टुकड़ों को मुठ्ठी में दबाता कौन है
ज़िंदगी तू ही बता तुझको निभाता कौन है

हम भी गैरत मन्द थे मजबूरियां कुछ भी करें
इतनी आसानी से सर वरना झुकाता कौन है

क़हक़हे बिकने लगे हैं आज कल बाज़ार में
रोज़ अपने आंसुओं में अब नहाता कौन है

आप ही मुजरिम नहीं मै भी गुनाहगारों में हूँ
सर बचा लेते हैं सब पगड़ी बचाता कौन है

आप की ज़र्रानवाज़ी आप ने पूछा हमें
जेब ख़ाली हो तो फिर ख़ातिर में लाता कौन है
thinkerbabu

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