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लखीमपुर खीरी के चुनावी स्थिति | Uttar pradesh election

Uttar pradesh election
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Written by नाज़िश खान
23 फरवरी 2022

लखनऊ, यूपी विधान (Uttar pradesh election)सभा चुनाव के चौथे चरण में यूपी के सबसे बड़े जिले लखीमपूर खीरी की बडी जोर-शोर से चर्चा हो रही है। किसान आंदोलन के दौरान हुए हिंसात्मक अत्याचार के आरोपी तथा केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा की रिहाई यहां का महत्वपूर्ण मुद्द बना हुआ है जो कि बीजेपी पर भारी पड़ता दिख रहा है।

लखीमपुर खीरी को पंजाब का गढ माना जाता है। पहले ही किसान एमएसपी मुद्दे पर सरकार से नाराज है और इस घटना के बाद तो बीजेपी के प्रत्याशी इस इलाके में आने से भी डर रहें है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां के सभी 8 सीटों को अपने नाम किया था, लेकिन इस माजरा कुछ अगल ही दिख रहा है।

अगर पलिया विधान सभा की बात करे तो यह नेपाल सीमा से जुड़ा है। यहां की ज्यादातर आबादी थारु आदिवासियों और दलित समाज की है। पलिया में 80 हजार दलित और 40 हजार थारु समाज के वोट है। यहां का अहम मुद्दा सड़क है क्योंकि बाढ़ आने की स्थिति में यह टूट जाती है। 15 किलोमीटर का रास्ता तय करने में 1 घंटा लग जाता है जिसकी वजह से यहां के लोग नाराज है। मुकाबला बीजेपी और सपा में देखने को मिल रहा है। सपा ने प्रीतेंद्र सिंह कक्कू को मैदान में उतारा है तो उनके सामने बीजेपी ने हरविंदर सिंह को प्रत्याशी के रुप में मैदान में उतारा है। हरविंदर सिंह को लोगो के बीच में नेता माना जाता है।

लखीमपुर खीरी में निघासन विधान सभा सीट भी सबसे ज्यादा चर्चा में हैं जहां तिकोनिया में किसान आंदोलन के दौरान थार गाड़ी चढने से किसानों की मौंत हो गई थी। इस इलाके को मिनी पंजाब भी कहा जाता हैं। यहां बड़े किसानों की संख्या अधिक पाई जाती है। इस चुनाव में इस घटना का भी असर देखा जा रहा है। यहां से सपा ने पूर्व विधायक औऱ पूर्व बसपा अध्यक्ष आर एस कुशवाह को टिकट दिया है तो भाजपा ने शशांक वर्मा को मैदान मे उतारा है। शशांक वर्मा पूर्व कैबिनेट मंत्री और विधायक रहे रामकुमार बर्मा के बेटे है। किसानों की नाराजगी का आलम यह है कि शशांक बर्मा डर के कारण सरदारों के गढ़ में प्रचार करने ही नहीं गए।

मोहम्मदी विधान सभा की बात करें तो इस इलाके में खनन और धान का सबसे बङा मुद्दा है। धान का एमएसपी मूल्य न मिलना भी किसानों की नाराजगी का मुख्य कारण हैं। दरअसल धान के मूल्य एमएसपी 1940 रुपए है लेकिन सरकार इसे इस दाम पर नहीं खरीद रहीं। इसे बिचौलिए और प्राइवेट राइस सेलर 800 से 1100 रूपए क्विंटल में खरीद रहे हैं। यंहा 80 हजार मुस्लिम और 40 हजार ब्राह्मण समाज के वोट है। राजनीति समीकरण देखें तो, सपा ने मुस्लिम गढ की संख्या देखते हुए लखनऊ के रहने वाले दाउद अहमद को प्रत्याशी बनाया है। दाउद को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने ब्राह्मण समाज को अपनी ओर करने के लिए लोकेंद्र प्रताप सिंह को टिकट दिया है।

अगर बात सदर विधान सभा की करें तो सपा से उत्कर्ष बर्मा मैदान में हैं तो भाजपा ने योगेश बर्मा को टिकट दिया है। इसमें खास बात ये है कि दोनों बर्मा करीबी रिश्तेदार हैं। यहां का मुख्य मुद्दा नदी में खनन होने से आम जनता में नाराजगी है क्योकिं रात भर रेत से भरे ट्रक और ट्रालिया चलती रहती है। गौरतलब बात यह है कि यहां केंद्रीय ग्रह राज्य मंत्री अजय कुमार टेनी के खास योगेश वर्मा को टिकट दी गई है। इसीलिए सबकी नजरें इस सीट पर टिकी हुई है।( Uttar pradesh election )

Cartoonist Irfan

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