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दोस्ती पर शायरी

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दोस्ती पर शायरी

दोस्ता तुझसे दोस्ती करके
सब ख़सारों से दोस्ती कर ली
मुहम्मद इमरान बशीर
۔
अब ये मेरी ख़ाहिश है चाँद से मुहब्बत हो
अब किसी सितारे से दोस्ती नहीं करनी
हिना कौसर
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कहा भी था कि तेरी नौकरी नहीं करेंगे
करेंगे इशक़ मगर दोस्ती नहीं करेंगे
नदीम मुल्क

दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा ना हूँ
बशीर बदर
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तुम तकल्लुफ़ को भी इख़लास समझते हो फ़राज़
दोस्त होता नहीं हर हाथ मिलाने वाला
अहमद फ़राज़
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दोस्ती पर शायरी


हमको यारों ने याद भी ना रखा
जॉन , यारों के यार थे हम तो
जॉन एलिया
۔
दाग़ दुनिया ने दिए ,ज़ख़म ज़माने से मिले
हमको तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
कैफ़ भोपाली
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यूं लगे दोस्त तेरा मुझसे ख़फ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से ख़ुशबू का जुदा हो जाना
क़तील शिफ़ाई

अर्श किस दोस्त को अपना समझूं
सब के सब दोस्त हैं दुश्मन की तरफ़
अर्श मलसियानी
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दोस्त ने दिल को तोड़ के नक़्श-ए-वफ़ा मिटा दिया
समझे थे हम जिसे ख़लील, काबा उसी ने ढा दिया
आरज़ू लखनवी

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