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Shairi

शाइरी (shairi ) एक ऐसी चीज़ है जो हमारे मन को शांत करती है। अच्छी शाइरी पढ़ने के लिए thinkerbabu.com को ज़रूर पढ़िए। यहाँ आप को हर topic पर बहुत अच्छी shairi पढ़ने के लिए मिलेगी। हमारी वेब पर हर मौके और हर topic पर शाइरी मौजूद है।

याद पर शाइरी

याद पर शाइरी

‘याद’ को उर्दू शाइरी में एक विषय के तौर पर ख़ास अहमिय हासिल है । इस की वजह ये है कि नॉस्टेलजिया और उस से पैदा होने वाली कैफ़ीयत, शाइरों को ज़्यादा रचनात्मकता प्रदान करती है । सिर्फ़ इश्क़-ओ-आशिक़ी में...

स्वप्निल तिवारी

चाँद डिनर पर बैठा है: एक संक्षिप्त विश्लेषण

स्वप्निल तिवारी की कविताओं का यह संग्रह “चाँद डिनर पर बैठा है” पढ़कर मन प्रसन्न हो गया। इनकी ग़ज़लों में शायरी का सौन्दर्य इतने ऊँचे स्तर पर है कि पाठक को ऐसा लगता है जैसे वह चाँद के साथ र...

विनय कुमार

कविता : खड़िया छूना

(मेरे गाँव में विद्यारंभ को खड़िया छूना कहते थे ) कवि: विनय कुमार याद आता है वो पाकड का फैला-फैला दरख़्तयाद आते हैं वो अतफ़ाल जो मेरी सिन केयाद आता है वो गर्द ओ ग़ुबार का चंदनयाद आते हैं कई खेल जो भुल...

Meer Taqi Meer

मीर तक़ी मीर के प्रख्यात अशआर

मीर तक़ी मीर के उर्दू के प्रख्यात कवी हैं। उनकी शाइरी पूरी दुनिया मैं पढ़ी जाती है। वह उर्दू ग़ज़ल के प्रमुख कवियों में से एक थे और उन्हें अक्सर उर्दू भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवियों में सबसे बड़े कवी के रूप...

haseeb soz

हसीब सोज़ की ग़ज़लें

रोज़ कुर्ते ये कलफ़-दार कहाँ से लाऊँ_तेरे मतलब का मै किरदार कहाँ से लाऊँ_दिन निकलता है तो सौ काम निकल आते हैं,ऐ ख़ुदा इतने मददगार_ कहाँ से लाऊँ सर बुलन्दओं के लिये सर भी कटा दूं लेकिनसर फिरों के लिये दस्...

aleena itrat

अलीना इतरत की ग़ज़ल

शाम के वक़्त चिराग़ों सी जलाई हुई मैंघुप अन्धेरों की मुन्डेरों पे सजाई हुई मैं देखने वालों की नज़रों को लगूँ सादा वरक़तेरी तहरीर में हूँ ऐसे छुपाई हुई मैं ख़ाक कर के मुझे सहरा में उड़ाने वालेदेख रक़्स...

बाल कविता /Baal Kavita

बाल कविता

अब मैं भी पढूँगा कवि: डॉ अभिषेक कुमार कंसल्टेंट नेत्र विशेषज्ञ बलिया , बेगूसराय , बिहार पापा – पापा मुझको भी एक स्लेट ला दीजियेमेरा भी बहुत मन कर रहा अब मैं भी पढूँगापढ़ – लिख कर खुद एक अच्...

कब जागोगे!

कब जागोगे!

कब जागोगे! कवि: मिन्हाज रिज़वी रात मैं न्यूज़ देखते देखते कब सो गया मुझे पता ही नहीं चलायह रात मुझ पर बहुत भारी गुज़रीयह मेरा अंतर्द्वंद था कल्पना थी यथार्थ था या मात्र मेरा सपनाबहर हाल जो भी था भयावह था...

ghazal/shairi

अशहद करीम उल्फत की ग़ज़ल

ग़ज़ल ज़िंदगी तेरी जुस्तजू लेकरक्यों भटकता हूं आरज़ू लेकर में जिसे चाहता हूं वह क्या हैक्या करेगा ये चीज़ तू लेकर रात गुजरी है जाग कर मेरीआंखें खुश हैं बहुत लहू लेकर ये कसक ,दुख,तड़प,चुभन मत पूछदिल की...