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यूपी चुनाव में टिकट वितरण में RSS की नहीं चलने दे रही भाजपा!

UP election update
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क्या वाकई में भाजपा यूपी चुनाव में आरएसएस की नहीं चलने दे रही है? हर चुनाव में भाजपा के लिए आरएसएस की खास भूमिका होती है। या यूँ कहे कि केवल चुनाव में ही नहीं बल्कि भाजपा के पूरे ताने-बाने में आरएसएस की भूमिका होती है। ऐसे में इस बार भाजपा के अंदर से एक हैरतअंगेज खबर आ रही है कि इस बार के यूपी चुनाव में भाजपा पार्टी के अंदर टिकट वितरण में आरएसएस के हस्तक्षेप को कम किया जा रहा है। इस तरह का प्रयास पार्टी के अंदर के मोदी गुट की ओर से किया जा रहा है। इस खबर में कितनी सच्चाई है इसका विशेषण आवश्यक है क्योंकि बगैर आरएसएस के सहयोग के भाजपा का अकेले अपने बलबूते चुनाव लड़ना बहुत बड़ी बात है। ऐसे में दो सवाल पैदा होता है कि क्या वास्तव में भाजपा इतनी समक्ष हो गयी कि वो अपने बलबूते चुनाव लड़ सकती है? और दूसरा सवाल यह है कि आखिर वो कौन सी वजह है जिसके कारण भाजपा आरएसएस से दूरी बना रही है?

भाजपा का बगैर आरएसएस के सहयोग के चुनाव लड़ना तो गले उतरने वाली बात नहीं ही है लेकिन एक बात स्पष्ट है कि आरएसएस जिस हिंदुत्व के एजेंडे के सहारे ओबीसी और दलित जातियों को एकजुट करती है उस हिंदुत्व का सबसे लोकप्रिय चेहरा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है जो कि भाजपा के सबसे शक्तिशाली नेता है। ‘हिंदुत्व’ के एजेंडे के अतिरिक्त आरएसएस के पास ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसके सहारे वो जनता को जोड़ सके। अब भाजपा खुद ही हिंदुत्व पर काम कर रही है।

आरएसएस के ‘हिंदुत्ववाद’ अर्थ मोदी के चेहरे में शिफ्ट हो चुका है

दूसरी बात यह है कि राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा होती ही है आरएसएस चुनाव में सहयोग करने के साथ-साथ सरकार बनाने में भी हस्तक्षेप करती है। इसका ज्वलंत उदाहरण पिछले विधानसभा चुनाव (2017) में मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का आना। यही कारण है कि भाजपा के अंदर का मोदी गुट चुनाव के टिकट बंटवारे में आरएसएस के हस्तक्षेप को सीमित करना चाहती है।

आरएसएस हिंदुत्ववादी गतिविधियों के जरिय हिन्दू समाज के सभी जातियों के करीब आ रही है। हिंदुत्व के एजेंडे से भाजपा को उन जातियों का भी कुछ न कुछ वोट मिल ही जाता है जिन जातियों की जातिगत पहचान वाली क्षेत्रीय पार्टियां मौजूद है। लेकिन अब नरेंद्र मोदी खुद ही हिंदूवाद राजनीति के प्रतीक बन गए है। देश में जितने भी हिंदूवादी गतिविधियां है वो सभी नरेंद्र मोदी के चेहरे से जुड़ चुकी है। उदाहरण के लिए अयोध्या में रामजन्म भूमि निर्माण के लिए बहुत ही लम्बा संघर्ष हुआ है जिसमें आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद आदि की प्रमुख भूमिका रही। लेकिन आज जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रामजन्म भूमि का निर्माण हो रहा है तो उसका सारा श्रेय नरेंद्र मोदी से जुड़ चुका है। इस तरह नरेंद्र मोदी आरएसएस के हिंदुत्ववादी मुहिम का विकल्प बन चुके है।

राष्ट्रवाद को भी हिंदुत्व से जोड़ने में सफल हो चुकी है भाजपा का मोदी गुट

मंदिर मस्जिद के साथ-साथ आरएसएस राष्ट्रवाद को भी अपने मुहिम का एक हिस्सा बनाई थी। भाजपा इस मुहिम में भी सफल हो चुकी है। वो देश की रक्षा करने वाले ऐतिहासिक पात्रों के साथ-साथ वर्तमान के सैनिकों के कुर्बानियों को भी हिंदुत्व से जोड़ चुकी है। और इस तरह मोदी का चेहरा राष्ट्रवाद और हिंदुत्व दोनों का प्रतीक बन चुका है। इसलिए यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं है कि आज आरएसएस के पास अपना कोई नया या भाजपा से अलग कोई एजेंडा नहीं है।

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