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स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ आरपीएन सिंह को टिकट दे सकती है भाजपा

स्वामी प्रसाद मौर्य
स्वामी प्रसाद मौर्य

स्वामी प्रसाद मौर्य की बगावत का भाजपा ने किया डैमेज कंट्रोल, कांग्रेस के दिग्गज आरपीएन सिंह भाजपा में शामिल

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इनकी गिनती कांग्रेस  के दिग्गज चेहरे के रूप में होती रही है। पार्टी छोड़ने से कुछ ही दिन पूर्व कांग्रेस की ओर से जारी स्टार प्रचारकों की सूची में आरपीएन सिंह का भी नाम शामिल है। इनका पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए गम्भीर क्षति का सबब हो सकता है। हालांकि कई कांग्रेसी नेताओं ने इनके इस निर्णय पर  प्रतिक्रिया दी है। आरपीएन सिंह को किसी ने ‘कायर’ तो किसी ने ‘डेडवेट’ कहा।

जिस कदर वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने इनके दल बदलने पर इनकी आलोचना की है उससे यही लगता है कि पार्टी सिर्फ बयानबाजी के जरिए डैमेज कंट्रोल करना चाहती है। पार्टी के राष्ट्रीय स्तर की छवि वाले  नेता के दल बदलने से फर्क तो पड़ता ही है। कांग्रेस के भीतर सीनियर नेताओं की अनदेखी का मसला रह-रह कर उभरता ही रहता है।

 उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, दिनेश शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और अनुराग ठाकुर की मौजूदगी में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आरपीएन सिंह को बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कराई है।

भाजपा में शामिल होने के उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जमकर तारीफ की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी के कारण देश में कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास जग पाया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कारण बहुत ही कम समय में कई  राष्ट्रनिर्माण संबंधी कार्य हुए हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने कानून व्यवस्था में काफी सुधार किए। कांग्रेसी नेताओं की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कई लोग मुझे बहुत पहले से ही कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने को कह रहे हैं। इसपर मैं यह कहना चाहूंगा कि देर आए दुरुस्त आए।

उन्होंने आगे कहा कि अब कांग्रेस पार्टी की सोच वह नहीं है जैसे माहौल में मैंने वहां काम करने की शुरुआत की थी।  32 सालों तक ईमानदारी और समर्पण के साथ मैं कांग्रेस पार्टी की सेवा करता रहा। उन्होंने कांग्रेस की वर्तमान कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।

एक बात तो निश्चित रूप से सही है कि कांग्रेस में किसी थिंक टैंक की अहमियत नहीं है। पार्टी की वर्तमान कार्यशैली से कोई भी जुझारू नेता उत्साहित नहीं है।

आरपीएन सिंह के भाजपा में जाने से यूपी के चुनाव में क्या फर्क पड़ सकता है ?

आरपीएन सिंह के जरिए बीजेपी स्वामी प्रसाद मौर्य के बगावत का डैमेज कंट्रोल कर रही है, पार्टी पूर्वांचल की राजनीति को साध रही है।सूत्रों के अनुसार आरपीएन सिंह को भाजपा  सपा में गए स्वामी प्रसाद मौर्या के खिलाफ कुशीनगर की पडरौना विधानसभा सीट से उतारने की सोच रही है। पडरौना में इनकी अच्छी खासी लोकप्रियता है। ऐसे में इन्हें स्वामी प्रसाद मौर्य को कड़ी टक्कर देने वाला माना जा रहा है।

आरपीएन सिंह से भाजपा को उम्मीद है कि वो पिछड़ी जाति में स्वामी प्रसाद मौर्य के प्रभाव को खत्म कर सकते हैं। ये पिछड़ी जाति के सैंथवार-कुर्मी जाति के हैं। पूर्वांचल में सैंथवार जाति की अधिक संख्या है।  कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया सहित कई और सीटों के जीत हार में इस जाति की निर्णायक भूमिका होती है। इसलिए पूर्वांचल की राजनीति में इनकी प्रभावशाली भूमिका मानी जाती है। आरपीएन सिंह के पिता सीपीएन सिंह 1980 में इंदिरा गांधी सरकार में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री भी रह चुके हैं। इसलिए इन इलाकों में इनकी खानदानी पहचान बनी है।

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