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अपनी मांगों के लिए दर-दर भटक रहा फैक्टनेब

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बिहार के वित्तरहित कॉलेजों के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने मांगों को लेकर दर-दर भटक रहे हैं। लेकिन इनकी हर मांग सरकारी अनदेखी का शिकार है। खबर है कि राज्य के वित्तरहित शिक्षकों एवं वित्तरहित कॉलेजों के कर्मचारियों की सबसे लोकप्रिय संगठन बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने अपनी मांगों के लिए अब विधानपरिषद के सभापति का दरवाजा खटखटाया है।

वित्तरहित शिक्षकों एवं कर्मचारियों की क्या-क्या मांगे हैं ?

बिहार के वित्तरहित कॉलेजों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सबसे पहली मांग है उनके आठ वर्षों से बकाया अनुदान का एकमुश्त भुगतान की जाए। इस मांग में डिग्री और इंटर कॉलेज दोनों के शिक्षक शामिल हैं।

इनकी मांग है कि संबद्ध डिग्री महाविद्यालयो को अंगीभूत किया जाए या फिर घाटानुदानीत की जाए। ताकि वेतनमान की विसंगति दूर हो सके। सभी कॉलेज शिक्षकों एवं कर्मचारियों को एक।समान वेतन मिल सके।

बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) की मांग है कि महाविद्यालय के आंतरिक स्रोतों से जो आय होती है उसका 70 प्रतिशत खर्च  शिक्षाकर्मियों के वेतनमान में  की जाए ताकि वेतन निर्धारण में कोई दिक्कत नहीं हो।

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति अधिनियम (संशोधित) 39(बी) के तहत संबद्ध डिग्री कॉलेजों  में इन्टरमीडिएट की पढ़ाई जारी रखने की बात कही गयी है। फैक्टनेब ने इस नियम के तहत कार्यवाई करने की मांग रखी है।

 बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) के संयोजक शंभूनाथ प्रसाद सिन्हा ने बिहार विधानपरिषद के अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को ज्ञापन सौंपा है। कोविड के बढ़ते संक्रमण के कारण विधानपरिषद के सत्र को स्थगित किया गया है। इस लिए उनके सरकारी आवास पर जाकर ज्ञापन सौंपा गया।

फैक्टनेब के मीडिया प्रभारी प्रो अरुण गौतम ने बताया कि विधानपरिषद के अध्यक्ष ने सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचारने का आश्वासन दिया है। अब देखना यह है कि इनके मांगों को लेकर सरकार की क्या मंशा बनती है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पहले ही कार्यकाल में बिहार से वित्तरहित शिक्षा नीति खत्म करने की बात कही थी लेकिन जब तक सभी शिक्षकों को एक समान वेतनमान नहीं मिलता है तब तक वित्त रहित शिक्षा नीति खत्म करने की बात बेईमानी होगी।

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