बेटी पर शायरी

बेटी पर शायरी

मीठी मीठी प्यारी सी कहानियां हैं
बेटियां तू सच्चे रब की मेहरबानीयां हैं
मुबश्शिर साद
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महकता रहता है दिल का जहान बेटी से
ज़माने भर में बढ़ी मेरी शान बेटी से
ज़रूरी ये नहीं बेटों से नाम रोशन हो
मेरे नबीﷺ का चला ख़ानदान बेटी से
मुनव्वर राना
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फिर आज देखने आएँगे लोग बेटी को
फिर आज करब से मुझको गुज़ारा जाएगा
ख़ालिद नदीम शानी

बाप का दुख मिला है बेटी को
और बेटे को जायदाद मिली

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बेटियां सब के मुक़द्दर में कहाँ होती हैं
घर ख़ुदा को जो पसंद आए वहां होती हैं
अली ज़रीवन
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पीतल की बालियों में बेटी ब्याह दी
जो बाप काम करता था सोने की कान में
मख़दूम हाश्मी

बेटी पर शायरी

उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते
हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
रहमान मुसव्विर
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अभी से छोटी हुई जा रही हैं दीवारें
अभी तो बेटी ज़रा सी मेरी बड़ी हुई है
शबाना यूसुफ़
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बाप के ज़िंदा रहने तक
हर बेटी शहज़ादी है
बिल्क़ीस ख़ान
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अब मुहब्बत की और हद क्या हो
मेरी बेटी में तू उभरता है
फौज़िया रबाब
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मुझको बख़शी ख़ुदा ने इक बेटी
चांद आँगन में इक उतर आया
शायान क़ुरैशी
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ऐसे तेवर दुश्मन ही के होते हैं
पता करो ये लड़की किस की बेटी है
ज़िया मज़कूर

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