(बबिता अस्थाना चौहान)

जीवन के संघर्षों को ढ़कते बबिता के ठहाके

अगर आप अपने क्षितिज का विस्तार करना चाहते हैं, अपनी पहचान के साथ जीना चाहते हैं तो आपको आत्मनिर्भर बनना होगा। जीवन के सही मायने तब ही समझ में आते हैं जब आप आत्मनिर्भर बन जाते हैं। उत्तर प्रदेश की बेटी बबिता अस्थाना चौहान अपने आप को ज़िंदगी के इन्हीं उसूलों पर ढाल चुकी हैं। उनमें जीवन के हर संघर्षों से सामना करने का हुनर है इसलिए उनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है। 

बबिता की ख़ास बात

बबिता की ख़ास बात यह है कि वो कभी किसी पर बोझ बनना नहीं चाहतीं। उनका मानना है कि जो लोग अपनी जिंदगी के फ़ैसले ख़ुद लेना चाहते हैं वैसे लोगों को पहले आत्मनिर्भर बनना चाहिए। जो दूसरों पर आश्रित हैं, रिश्तों के बदौलत जीवन जी रहे हैं वैसे लोग अपने जीवन का कोई निर्णय बग़ैर दबाव में आए कैसे ले सकते हैं! 

(अपनी बेटी अद्विका के साथ बबिता)

उड़ते पंक्षियों की भांति जीवन

बबिता उड़ते पंक्षियों की भांति जीवन जी रही हैं। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जी से मिलने के बाद राजपथ पर परेड करते हुए बबिता है ठान लिया कि अब चाहें जो हो जाये दिल्ली आना है, आगरा के सैंट जॉन्स कॉलेज से भूगोल में परस्नातक कर वो पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए घर से दूर, माता-पिता की निगरानी से ओझल हो कर दिल्ली चले जाना उनके जीवन का महत्वपूर्ण साहसिक क़दम रहा। वो बताती है कि लड़की होने के कारण उनके पिता उन्हें दिल्ली नहीं जाने देना चाहते थे। बेटी की सुरक्षा हर पिता के लिए बड़ा मसला होता है। लेकिन लड़कियों के लिए आर्थिक रूप से सशक्त होना भी बहुत ज़रूरी है। क्योंकि घर चाहे पिता का हो या पति का, आप जिस रिश्ते पर आश्रित हो जाएंगे वही रिश्ता आपके महत्व को कम कर देगा, आपको अपने ही घर में दोयम दर्जे का नागरिक बना देगा। भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई के क्रम में ही उन्होंने काम करना शुरू किया है।

अपनी विशेष पहचान बनाई

प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करते हुए अपनी विशेष पहचान बनाई। आगरा शहर के छोटे से मोहल्ले से बाहर निकल कर  दिल्ली में पढ़ाई करनी हो या नौकरी करनी हो, बबिता ने अपने जीवन के तमाम निर्णय ख़ुद लिए हैं लेकिन इस सब में उनका साथ उनकी मम्मी, उनके चाचाजी, भाई-बहनों, स्कूल, कॉलेज के अद्यापकों और दोस्तों ने दिया…वो रिटायर्ड मेजर जनरल प्रताप दयाल सर की हमेशा शुक्रगुज़ार हैं जिन्होंने दिल्ली के सफ़र में उनका साथ दिया…हांलाकि बाद में उनके पिता श्याम अस्थाना भी उनके सफ़र में उत्साह बढ़ाने लगे। 

लड़की का हुनर और पढ़ाई ही सच्चा दहेज

बबिता ने अपनी शादी का फ़ैसला भी ख़ुद ही लिया और प्रेम विवाह किया। उनके अनुसार किसी  भी लड़की के लिए उसका हुनर और पढ़ाई ही सच्चा दहेज है। बबिता हँसती हुई बताती हैं कि शादी के बाद दिल्ली से मुंबई शिफ्ट हो जाने पर आर्थिक चुनौतियों को झेलना आसान नहीं था। लेकिन शादी हमने अपनी मर्ज़ी से की थी इसलिए हम दोनों संघर्ष के समान भागीदार बनें। और भागीदारी आज तक क़ायम है।  

फ़िल्म प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिला

बबिता अपने पति श्री अतुल चौहन के साथ मिलकर workoholic productions LLP नाम का एक प्रोडक्शन हाउस चलाती हैं, जो कि मुम्बई बेस्ड कम्पनी है। वो यहाँ Director के पद पर कार्यरत हैं। इनकी कम्पनी अभी देश के कई प्रतिष्ठित सरकारी और गैर सरकारी कंपनियों के लिए विज्ञापन बना चुकी है। उनकी शॉर्ट फ़िल्म “लिफ़्ट मिलेगी” को भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर शॉर्ट फ़िल्म प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मिला है जिसमें देश की 300 फ़िल्मों को पीछे छोड़ बबिता ने ये पुरस्कार जीता । बबिता #मेरीपतंग नाम का एक YouTube channel और फ़ेसबुक पेज भी चलाती हैं जहां उनकी एवम् अन्य लोगों की कविताओं और समाज से जुड़े मुद्दों की बात होती है।

मां होना बड़ी ज़िम्मेदारी

वो कहती हैं पति के सहयोग के बिना घर और ऑफिस सम्हालना आसान नहीं एक मां होना भी बड़ी ज़िम्मेदारी है, पति का पूरा सहयोग है इसीलिए वो अपनी 6 साल की बेटी अद्विका और अपनी कम्पनी दोनों को बराबर समय दे पाती हैं। 

बबिता के जीवन से सीखने वाली बात यह है कि परिस्थितियां चाहें जो हों वो खुलकर हँसती हैं, ऐसा इसलिए कि उनमें आत्मनिर्भर होने का जज़्बा है। उनकी एक हँसी उनके जीवन के कई संघर्षों को ढक देती है।

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7 thoughts on “जीवन के संघर्षों को ढ़कते बबिता के ठहाके”

  1. Uddeshika kulshrestha

    This life journey is so much inspiring 😊
    It shows that her life is filled with struggles and achievements ❤️

  2. Sandeep kulshrestha

    मै सहमत हूँ और आशीर्वाद देता हूँ कि तुम खुश रहो और आगे बढ़ती रहो !

  3. बेलाग शानदार और उन्मुक्त सोच की धनी बबिता जी….जीवन पथ पर नए आयाम आपको मिले यही शुभकामना बधाई…

  4. जितेन्द्र नाथ अस्थाना

    बबीता की लगन,साहस और मेहनत के लिए बहुत-बहुत सराहनीय है।

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