ghazal/shairi

अशहद करीम उल्फत की ग़ज़ल

ग़ज़ल


ज़िंदगी तेरी जुस्तजू लेकर
क्यों भटकता हूं आरज़ू लेकर

में जिसे चाहता हूं वह क्या है
क्या करेगा ये चीज़ तू लेकर

रात गुजरी है जाग कर मेरी
आंखें खुश हैं बहुत लहू लेकर

ये कसक ,दुख,तड़प,चुभन मत पूछ
दिल की दौलत हूं कूबकू लेकर

चाक दामन मेरा नहीं रहता
दोस्तो हाजते रफू लेकर

आईना ने संभाल रख्खा है
मेरी तस्वीर हुबहू लेकर

मेरी उल्फत की यार कद्र करो
बे नमाज़ी गए वजू लेकर

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