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अलविदा शायरी

Read Hindi Poetry and Hindi Kavita on various topics. In this selection of poems, you can read Alvida Par Hindi Poetry. It contains the topics of Goodbye Hindi Poetry or Khuda Hafiz, Bye Topic Poetry in Hindi Whatsapp Status Poetry, and Hindi Quotes Poetry TikTok Status.

अलविदा शायरी
अलविदा शायरी

तुम सुनो या ना सुनो हाथ बढ़ाओ ना बढ़ाओ
डूबते डूबते इक बार पुकारेंगे तुम्हें
इर्फ़ान सिद्दीक़ी
۔
अलविदा कह चुके हैं हम तुमको
जाओ आँखें पे अब ध्यान ना दो
नामालूम
۔
उसने ये सोच कर हमें अलविदा कह दिया मुहसिन
ये ग़रीब लोग हैं मुहब्बत के सिवा किया देंगे
मुहसिन नक़वी
۔
फिर यूं हुआ कि साथ तेरा छोड़ना पड़ा
साबित हुआ कि लाज़िम हो, मल्ज़ूम कुछ नहीं
۔
इशारा तो मदद का कर रहा था डूबने वाला
मगर याराने साहिल ने सलाम-ए- अलविदा समझा
नामालूम

रुख़सत-ए-यार का मंज़र था अजब ही मंज़र
हमने ख़ुद से ही बिछड़ते हुए ख़ुद को देखा
ज़ीशान साजिद
۔
जुदाई काम अपना कर गई है
तुझे पाने की ख़ाहिश मर गई है
۔

अलविदा शायरी


ना पीछे मुड़ के अब देखो, ना ही आवाज़ दो मुझको
बड़े मुश्किल से सीखा है किसी को उल-विदा कहना
۔
दुख ये है मेरे यूसुफ़-ओ-याक़ूब के ख़ालिक़
वो लोग भी बिछड़े जो बिछड़ने के नहीं थे
۔
ख़ुशी ख़ुशी तुझे ए दोस्त अलविदा कह कर
तमाम उम्र कहीं छुप के हमको रोना है

मेरा इक मशवरा है इल्तिजा नईं
तो मेरे पास से इस वक़्त जा नईं
जून एलिया
۔
बड़े सुकून से रुख़स्त तो कर दिया उस को
फिर उस के बाद मुहब्बत ने इंतिहा कर दी
۔
इस गली ने ये सुनके सब्र किया
जानेवाले यहां के थे ही नहीं
जून ईलिया
۔
अब तो जाते हैं बुत-कदे से मीर
फिर मिलेंगे अगर ख़ुदा लाया
मीर तक़ी मीर
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अलविदा शायरी


उसको रुख़स्त तो किया था मुझे मालूम ना था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
निदा फ़ाज़ली

जानेवाले से मुलाक़ात ना होने पाई
दिल की दिल में ही रही बात ना होने पाई
शकील बद एवनी
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आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगा
जानेवाले तू हमें याद बहुत आएगा
अबैदुल्लाह अलीम
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जाते हो ख़ुदा-हाफ़िज़ हाँ इतनी गुज़ारिश है
जब याद हम आ जाएं मिलने की दुआ करना
जलील मानक पूरी
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अब तुम कभी ना आओगे यानी कभी कभी
रुख़स्त करो मुझे कोई वादा किए बग़ैर
जून ईलिया
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ये एक पेड़ है आ इस से मिल के रो लें हम
यहां से तेरे मरे रास्ते बदलते हैं
बशीर बदर

अलविदा शायरी

अब के जाते हुए इस तरह किया उसने सलाम
डूबने वाला कोई हाथ उठाए जैसे
नामालूम
۔
गूँजते रहते हैं अलफ़ाज़ मेरे कानों में
तो तू आराम से कह देता है अल्लाह हाफ़िज़
नामालूम
۔
मैं जानता हूँ मेरे बाद ख़ूब रोएगा
रवाना कर तो रहा है वो हंसते हंसते मुझे
अमीन शेख़
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कलेजा रह गया उस वक़्त फट कर
कहा जब अलविदा उसने पलट कर
पवन कुमार
۔
वो अलविदा का मंज़र वो भीगती पलकें
पस-ए-ग़ुबार भी किया-क्या दिखाई देता है
शकेब जलाली
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ये हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर
इस दिल का जो भी हाल तुझे देखकर हुआ
नामालूम
۔

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