बाल कविता /Baal Kavita

बाल कविता

अब मैं भी पढूँगा

कवि: डॉ अभिषेक कुमार कंसल्टेंट नेत्र विशेषज्ञ बलिया , बेगूसराय , बिहार

पापा – पापा मुझको भी एक स्लेट ला दीजिये
मेरा भी बहुत मन कर रहा अब मैं भी पढूँगा
पढ़ – लिख कर खुद एक अच्छा इंसान बनूंगा
दूसरे लोगों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करूँगा
जब इंसान पढ़ेंगे तभी तो जागरूक बनेंगे
पढ़े लिखे इंसान ही जात – पात , ऊंच – नीच
जैसे सामाजिक विसंगति को दूर करेंगे
मैं खुद पढ़ – लिख कर सामाजिक विसंगतियों से लड़ूँगा


पापा – पापा मुझको भी एक स्लेट ला दीजिये
मेरा भी बहुत मन कर रहा अब मैं भी पढूँगा
पढ़ – लिख कर देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनूँगा
दूसरे लोगों को भी देश के प्रति नैतिक जिम्मेदारी समझाऊँगा
जब इंसान पढ़ेंगे तभी तो जागरूक बनेंगे
बाल श्रम , भ्रूण हत्या , दहेज प्रथा , घरेलू हिंसा
जैसे सामाजिक विसंगतियों को दूर करेंगे
मैं खुद पढ़ – लिख कर इन सामाजिक विसंगतियों के लड़ूँगा

पापा – पापा मुझको भी एक स्लेट ला दीजिये
मेरा भी बहुत मन कर रहा अब मैं भी पढूँगा
पढ़ – लिख कर खुद एक जागरूक इंसान बनूँगा
दूसरे लोगों को भी सामाजिक विसंगतियों के विरुद्ध जागरूक करूँगा
जब इंसान पढ़ेंगे तभी तो जागरूक बनेंगे
गरीबी , बेरोजगारी , अशिक्षा और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण समझेंगे
जब इन सामाजिक विसंगतियों के कारण समझेंगे तभी तो उसे दूर करेंगे
मैं खुद पढ़ – लिख कर इन सामाजिक विसंगतियों से लड़ूँगा


पापा – पापा मुझको भी एक स्लेट ला दीजिये
मेरा भी बहुत मन कर रहा अब मैं भी पढूँगा
पढ़ – लिख कर जीवन में सफल बनूँगा
दूसरे लोगों को भी पढ़कर जीवन में सफल बनने के लिए प्रेरित करूँगा ।
thinkerbabu

Leave a Comment

Your email address will not be published.