Month: August 2021

सूरज पर शायरी

कॅरोना वायरस पर शायरी

कॅरोना वायरस पर शायरी तलाश-ए-मुहब्बत में घर बैठे रोनाकॅरोना कॅरोना को बस भी करो नाअरशद सईद शहर के हालात को हल्का ना ले ।देख मेरी बात को हल्का ना ले ।۔अब मुहाफ़िज़ हैं समाजी दूरियाँफ़ासलों की घात को हल्का ना ले۔मश्वरा सुन ले तबीब-ए-वक़्त कातिब्बी तशरीहात को हल्का ना ले ख़ाक कर देगी वबाई ज़िंदगीमौत …

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ज़िन्दगी पर शायरी

ग़ुरूर / घमंड पर शायरी

ग़ुरूर / घमंड पर शायरी आसमां इतनी बुलंदी पे जो इतराता हैभूल जाता है ज़मीं से ही नज़र आता हैवसीम बरेलवी शोहरत की बुलंदी भी पल-भर का तमाशा हैजिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती हैबशीर बदर अदा आई जफ़ा आई ग़रूर आया हिजाब आयाहज़ारों आफ़तें लेकर हसीनों पर शबाब आयानूह नार्वे वो …

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पेड़ पर शायरी

कुन्दन

बेगम और बच्चे सीज़न के लिए नथैया गली रवाना हुए, प्लान के मुताबिक़मुझे भी दो दिन के बाद उनसे जा मिलना था , मगर मिनिस्टर साहिब के दौरे की वजह से सब सरकारी नौकरीयों वालों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गईं तो मुझे रुकना पड़ा.पहली बार बेगम की बेहद कमी महसूस हुई . सारा घर …

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साहिर लुधियानवी

आप साहिर कैसे बन सकते हैं?

साहिर साहिब की शेअरी और अदबी सलाहीयतों से हमें इनकार नहीं, फिल्मों में आपका बड़ा मुक़ाम है। हक़ीक़त ये है कि आज भी वो नौजवानों के दरमयान सबसे मक़बूल शायर हैं और उर्दू, हिन्दी में उनकी किताबें सबसे ज़्यादा बिकती हैं। साहिर की अदबी और फ़िल्मी शायरी अलग अलग नहीं क्योंकि उन्होंने जो कुछ महसूस …

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रोटी पर शायरी

शब्द गुमनाम पर शाइरी

जब छेड़ती हैं उनको गुमनाम आरज़ूएँवो मुझको देखते हैं मेरी नज़र बचा केअली जव्वाद ज़ैदी वो एक शख़्स कि गुमनाम था ख़ुदाई मेंतुम्हारे नाम के सदक़े में नामवर ठहराहमीद कौसर जमी है गर्द आँखों में कई गुमनाम बरसों कीमरे अंदर ना जाने कौन बूढ़ा शख़्स रहता हैअज़हर नक़वी गुमनाम एक लाश कफ़न को तरस गईकाग़ज़ …

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चाँद पर शाइरी

प्यार की शाइरी

दिल धड़कने का सबब याद आयावो तरी याद थी अब याद आयानासिर काज़मी करूँगा क्या जो मुहब्बत में हो गया नाकाममुझे तो और कोई काम भी नहीं आताग़ुलाम मुहम्मद क़ासिर तेरे इशक़ की इंतिहा चाहता हूँमरी सादगी देख क्या चाहता हूँअल्लामा इक़बाल तुमको आता है प्यार पर ग़ुस्सामुझको ग़ुस्से पे प्यार आता हैअमीर मीनाई इशक़ …

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पत्थर पर शायरी

मुहब्बत पर शायरी

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दोना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जायेबशीर बदर और भी दुख हैं ज़माने में मुहब्बत के सिवाराहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवाफ़ैज़ अहमद फ़ैज़ रंजिश ही सही दिल ही दिखाने के लिए आआ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आअहमद …

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ख़ुद्दारी पर शायरी

रूठ जाने पर शायरी

रूठने पर बेहतरीन शायरी का इंतिख़ाब पढ़ें और पसंद आने पर दोस्तों से साथ शेयर करें मुझको आदत है रूठ जाने कीआप मुझको मना लिया कीजियेजून ईलिया हाय वो लोग हमसे रूठ गएजिनको चाहा था ज़िंदगी की तरहजावेद कमाल रामपूरी ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामदक़मर तुम बिगाड़ोगे आदत किसी कीक़मर जलालवी ना जाने रूठ …

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चिकनी-चुपड़ी बात करती राज्य सरकार

तड़प- तड़प कर मर रहे शिक्षाकर्मी, चिकनी-चुपड़ी बात करती राज्य सरकार : फैक्टनेब बिहार राज्य संबद्ध डिग्री महाविद्यालय शिक्षक शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ (फैक्टनेब) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि संबद्ध डिग्री महाविद्यालय के लगभग 25 हजार शिक्षाकर्मी अपने परिजनों के साथ  राज्य सरकार की उपेक्षापूणॆ नीति के कारण तड़प तड़प मरने को मजबुर …

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तालिबान कमजोर क्यों नहीं हुआ

तालिबान कमजोर क्यों नहीं हुआ

आखिर इतने वर्षों तक अमेरिकी सैनिक की मौजूदगी के बावजूद तालिबान कमजोर क्यों नहीं हुआ By नौशीन खान न्यूयॉर्क शहर में बड़ा धमाका 2001 , 11 सितम्बर , दिन मंगलवार अमेरिका के वॉशिंगटन डीसी और न्यूयॉर्क शहर में बड़ा धमाका हुआ । दुनियां के सबसे बड़े बिजनेस वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के जुड़वा टावर और डिफेंस …

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