लावारिस जानवरों को अपने बच्चों की तरह पालती हैं नाश रजक पम्ब्रा

मुंबई की नाश रजक पम्ब्रा आम लोगों से बिल्कुल अलग हैं। ये न सिर्फ अपनी जिंदगी को खुलकर जीना चाहती हैं बल्कि दर्जनों लावारिस कुत्तों, बिल्लियों को अपने बच्चे की तरह प्यार करती हैं।

हमसे से ज्यादातर लोग तो गली के कुत्तों को देख दूर भागते हैं। कोई उन्हें अछूत समझता है तो कोई अशुभ। हम यह समझते ही नहीं कि गली के लावारिस जानवर जैसे कुत्ते- बिल्ली आदि की मौजूदगी मानव समाज के लिए लाभदायक ही है और हमसबका इन बेजुबानों के प्रति कुछ कर्तव्य भी है। 

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मुंबई की नाश रजक पम्ब्रा आम लोगों से बिल्कुल अलग हैं। ये न सिर्फ अपनी जिंदगी को खुलकर जीना चाहती हैं बल्कि दर्जनों लावारिस कुत्तों, बिल्लियों को अपने बच्चे की तरह प्यार करती हैं। ये घर में खुद अपने हाथों से खाना पकाती है और निकल जाती हैं सड़क पर जहाँ इनके बच्चे यानि लावारिस कुत्तें इनका इंतजार कर करते हैं। ये अपने घर में भी कई कुत्तों- बिल्लियों को पालती हैं।

ऐसा नहीं कि नाश रजक पम्ब्रा के राह में कोई कठिनाई नहीं है। दरअसल इनमें सेवा और लगन इतनी है कि इन्हें कठिनाई और थकान का पता ही नहीं चलता। इनके इस बात की सदैव चिंता रहती है कि इनके पशु प्रेम से घर में बच्चों तथा पति को कोई परेशानी न हो। घर के माहौल को तनाव मुक्त बनाने के लिए ये हमेशा मनमोहक ढंग से बाते करती हैं, वीडियो शूट करती हैं ताकि घर में कुत्तों और बिल्लियों की मौजूदगी किसी को उबाऊ न लगे।

जानवरों के प्रति लगाव इनका व्यक्तिगत जुनून है। इनके इस जुनून को देखकर इनके पति और बच्चे भी जानवरों को खाना खिलाती है या इनके काम में हाथ बटाते हैं। घर में दर्जनों जानवरों को पालना और घर के किसी भी सदस्य को इससे परेशान न होने देना यह वाकई में चुनौतीपूर्ण काम है। 

नाश रजक पम्ब्रा का मानना है कि अपने लिए जीना कोई बड़ी बात नहीं है, अपने पति और बच्चों के लिए तो हर औरत खाना बनाती ही है लेकिन गली के बेजुबानों के भोजन और इलाज का ध्यान रखना आपको आम इंसानों से अलग करता है। इन लावारिस जानवरों में इंगेज रहना उन्हें शुकुन देता है।

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