बिहार के विकास के लिए नीतीश का नेतृत्व आवश्यक : अंजुम आरा

पेशे से वकील और डुमरांव विधानसभा क्षेत्र से जदयू कोटे से चुनाव लड़ चुकी अंजुम आरा की गिनती बिहार की चर्चित महिला युवा राजनेताओं में होती है। ये अपने बेबाक टिप्पणी के लिए मशहूर हैं। बतौर जदयू प्रवक्ता अंजूम आरा विपक्षियों पर सबसे अधिक आक्रामक दिखती हैं।

बिहार की चर्चित युवा महिला नेत्री और जदयू की प्रवक्ता अंजुम आरा ने thinkerbabu से बात करते हुए कहा कि बिहार के विकास के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व बहुत आवश्यक है। आज नीतीश कुमार के अतिरिक्त अन्य कोई भी बिहार को शांति, सौहार्द्र और विकास के रास्ते नहीं ले जा सकता है। बिहार जातिवाद के दंश को कई दशकों तक झेला है। उस समय बिहार  सिर्फ हिंसा, अपराध तथा भ्रष्टाचार के प्रयोगशाला बन गया था। हर सरकारी फाइलों को भ्रष्टाचार से ही गतिवान किया जाता था। जातिगत हिंसा और जातिगत अपराध ही बिहार की पहचान बन गयी थी। जब से बिहार के नेतृत्व की बागडोर नीतीश कुमार के हाथों में आया है तब से राज्य की छवि बदली है। आज कोई भी बिहारी इस सकारात्मक बदलाव से इनकार नहीं कर सकता है।

अंजूम आरा ने कहा कि यह हर कोई महसूस करता है कि नीतीश कुमार की राजनीति के केंद्र में जातिगत सदभाव और धार्मिक भाईचारा  है। मुख्यमंत्री किसी भी हाल में जातिगत या धार्मिक तनाव को उभरने नहीं देते हैं । इसी का परिणाम है कि बिहार नरसंहार या दंगा के कुचक्र से आज पूरी तरीके से सुरक्षित है। नीतीश कुमार सभी जातियों और धर्मो के लोगों को साथ लेकर चलते हैं। यही उनकी असली ताकत है। इसलिए वो हिंसा को तनिक भी बर्दाश्त नहीं करते हैं। यह कोई साधारण बात नहीं है। बिहार ने ऐसे कई  खौफनाक उदाहरण देखे है जब जातिगत हिंसा के आधार पर ही राजनीति की सियासी चालें चली गई। आज हर कोई नीतीश के सुशासन में सुरक्षित है। इसी बदलाव के कारण बिहार की छवि बदली है।

जदयू प्रवक्ता अंजुम आरा पार्टी में एक जबावदेह नेता के रूप में जानी जाती हैं। (फाइल फोटो)


जदयू प्रवक्ता अंजुम आरा को इस बात का संतोष है कि आखिरकार बिहार की जनता ने राजद को नकार दिया है। राजद का चुनाव जीतना बिहार के लिए लालूराज के सभी अपराधों के लिए दरवाजा खोलने जैसा होता । यह हम बिहारियों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं होता। लेकिन राज्य की जनता ने पूरी गम्भीरता से निर्णय लेकर जनमत दिया है।

अंजुम आरा ने कहा कि तेजस्वी यादव को राजनीति विरासत में मिली है इसलिए उनमें बिहार की जनता को समझने की क्षमता नहीं है। वंशवाद की राजनीति किसी में नेतृत्व क्षमता पैदा नहीं कर सकती। उन्हें तो विरासत में भी नफरत करने वाली राजनीति मिली है। लोग उन पर विश्वास कर ही नहीं सकते। उनका काम केवल काम करने वाले पर अंगुली उठाना है, विकास करने वाले पर अंगुली उठाना है। 

चुनाव हारने में बाद भी अंजुम आरा अपने क्षेत्र में सक्रिय रहती हैं। (फाइल फोटो)


अंजुम आरा ने कहा कि कांग्रेस लुप्तप्राय प्रजाति वाली पार्टी बन गयी है। कांग्रेस बिहार में अपना वजूद खो दिया है।  राजद-कांग्रेस का गठबंधन दूध पानी की तरह इस कदर घुलमिल गयी है कि कांग्रेस का वजूद ही खत्म हो गया है।

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