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पत्थर पर शायरी

पत्थर पर शायरी
पत्थर पर शायरी

दिल पत्थर के लब पत्थर के
जिसको देखो सब पत्थर के
कृष्ण परवेज़
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पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इन्सां पाए हैं
तुम शहर-ए-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं
सुदर्शन फ़ाकिर
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तमाम फेंके गए पत्थरों पे भारी था
वो एक फूल अकेला सभों पे भारी था
फ़र्ख़ जाफ़री
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पत्थर हैं सभी लोग करें बात तो किस से
इस शहर-ए-ख़मोशाँ में सदा दें तो किसे दें
आनिस
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हर तरफ़ पत्थर ही पत्थर दरमियाँ शीशे का घर
ले रहा है शायद अपना इम्तिहाँ शीशे का घर
सय्यद तुय्यब वास्ती

हर जानिब से आए पत्थर
अशक आँखों में लाए पत्थर
शब्बीर नाक़िद
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दिल भी पत्थर सेना पत्थर आँख पे पट्टी रखी है
किस ने ये पानी से बाहर रेत पे मछली रखी है
इंतिज़ार ग़ाज़ी पूरी
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पत्थर को पूजते थे कि पत्थर पिघल पड़ा
पल-भर में फिर चट्टान से चशमा उबल पड़ा
सईद अहमद
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अपनी क़िस्मत के हुए सारे सितारे पत्थर
फूल दामन में तेरे और हमारे पत्थर
रशीद अलज़फ़र

मेरी मिट्टी में जब ना था पत्थर
कैसे कह दूं कि है ख़ुदा पत्थर
डाक्टर आज़म
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हुसैन ताज की सूरत ये बे-सदा पत्थर
दिखा रहे हैं मुहब्बत का मोजिज़ा पत्थर
सबीहा सुंबुल
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पत्थर पर शायरी

इन्सान को मिलते हैं नई बात के पत्थर
टकराते हैं जिस वक़्त ख़्यालात के पत्थर
ज़हीर अलनिसा-ए-निगार
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परश्तिश कर रहा है हर जवान-ओ-पीर पत्थर की
सनम-ख़ाने में आकर जाग उठी तक़दीर पत्थर की
जोहर बद एवनी

कौन सा है शहर जिसमें में भटक कर आ गया
रास्ते पत्थर के हैं और बाम-ओ-दर पत्थर का है
अज़हर नय्यर
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किसी की जुब्बा साई से कभी घुसता नहीं पत्थर
वो चौखट मोम की चौखट है या मेरी जबीं पत्थर
हबीब मूसवी
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अगर ख़ुद पर भरोसा है तो उल्फ़त
उभर आते हैं चेहरे पत्थरों पर
उलफ़त बटालवी
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जिनके रस्तों से सदा मैंने हटाए पत्थर
वो मेरे सर के लिए ढूंढ के लाए पत्थर
अफ़रोज़ रिज़वी
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नज़र कर तेज़ है तक़दीर मिट्टी की के पत्थर की
बुतों को देख हैं तस्वीर मिट्टी की के पत्थर की
रशीद लखनवी

इन चटख़्ते पत्थरों पर पांव धरना ध्यान से
ढल चुकी है शाम वादी में उतरना ध्यान से
बशीर अहमद बशीर
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मुक़द्दस पत्थरों पर मुद्दा रोशन ना होने का
कहाँ सर फोड़िए अब मोजिज़ा रोशन ना होने का
ख़ुरशीद अकबर
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मुझे पत्थरों से बढ़कर तेरी इक कली ने मारा
मुझे दुश्मनों से बढ़कर तेरी दोस्ती ने मारा
क्रीम रूमानी
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हर घड़ी हर लम्हा उठते पत्थरों के साथ में
टूटे टूटे कितने शीशों के घरों के साथ में
नोमान इमाम

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