खेलों में बिहार की दयनीय स्थिति

By मों अलताफ अली

खेलों का महाकुम्भ ओलिंपिक शुरू हो गया जो 8 अगस्त तक चलेगा। इस बार का ओलिंपिक जापान के टोक्यो शहर में हो रहा हैं। जिसमें 206 देशों से 11000 से ज्यादा एथलीट्स 33 खेलों की 339 स्पर्धाओं में अपना दम  लगाएंगे। भारत की दिग्गज मुक्केबाज एमसी मेरी कॉम और पुरुष हॉकी के कप्तान मनप्रीत सिंह भारत के ध्वजवाहक होंगे। भारत की तरफ से इस बार टोक्यो ओलिंपिक में 127 एथलीट ओलिंपिक में हिस्सा लेंगे। जिसमें एमसी मैरीकॉम, मनप्रीत सिंह, दीपिका कुमारी, बजरंग पुनिया, नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधू जैसे नाम शामिल है जो भारत को पदक दिलाने की दम ख़म रखते है।

यह बहुत ख़ुशी की बात है कि दिन प्रतिदिन भारत खेलों में देश दुनिया में अपना नाम बड़ा कर रहा है, इस बार के ओलिंपिक में भारत के लगभग हर राज्यों के एथलीट ने हिस्सा लिया है। लेकिन एक राज्य ऐसा है जो आज़ादी के 75 सालों  के बाद भी खेलों में अपनी छवि सुधार नहीं पाया है वो है अपना बिहार। बिहार का एक भी एथलीट अपने आप को ओलिंपिक में साबित करने में विफल रहा है।

बात सिर्फ ओलिंपिक की नहीं है बिहार हर खेल के मामले में  पीछे है चाहे वो बात क्रिकेट की हो या फुटबॉल और हॉकी की बिहार की हालत आज भी दयनीय बनी  हुई है। हमें अपने पड़ोसी राज्य झारखण्ड से कुछ सीखना चाहिए जो सिर्फ 21 सालों में अपने आप को खेलों के मामले में इस मुकाम पर पंहुचा दिया, जहाँ से महेंद्र सिंह धोनी और शौरभ तिवारी जैसे क्रिकेटर देश को मिले।

इस बार के टोक्यो ओलिंपिक में  झारखण्ड से तीन एथलीट है जो देश को पदक दिलाने की दम रखते है इसमें दीपिका कुमारी (तीरंदाजी),निक्की प्रधान (हॉकी) और सलीमा टेटे (हॉकी) से ताल्लुक रखते है। ये बड़े गर्व की बात है की झारखण्ड इतने काम समय में खेलों में इतना विकास किया है लेकिन बिहार के लिए ये शर्म की बात है की इतने बड़े राज्य में एक ढंग का स्टेडियम भी नहीं है जहाँ खिलाडी प्रैक्टिस कर सके,ये खेल मंत्रालय की नाकामी और लापरवाही है जिस की वजह से न जाने कितने होनहार खिलाडी की ज़िन्दगी ख़तम हो गयी इंतज़ार करते करते मगर बिहार ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया और हालत आज ऐसी है की पटना का एक मात्र स्टेडियम मोइनुलहक स्टेडियम जहाँ एक वक़्त में इंटरनेशनल मैच होते थे वहां आज सन्नाटा पसरा हुआ है। 

अभी भी वक़्त है,बिहार को खेलों के मामले में सुधार करना चाहिए वरना एक वक़्त ऐसा आएगा जब भारत के खेलों में बिहार की हिस्सेदारी जीरो हो जाएगी और न जाने कितने बच्चों का सपना बस इस लिए पूरा नहीं हो पायेगा क्योंकि वो बिहार के निवासी हैं।

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