केवल बच्चे ही पैदा नहीं करती बल्कि सफलता का संसार भी रचती हैं महिलाएं

ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि जिम जाने से सिर्फ शारीरिक बदलाव को ही महसूस किया जा सकता है लेकिन जिम का वर्क आउट आपके सोच-समझ को भी बदल देता है। यहां महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ जाता है। कठिन और लंबे समय तक किये गए वर्क आउट से आपकी उम्र 10-15 साल कम की तो दिखने ही लगती है साथ ही जो कॉन्फिडेंस बढ़ता है वह आत्मनिर्भर बनने तथा कुछ करने के लिए प्रेरित भी करता है।

महिलाएं अपने बल बुते अपनी दुनिया सजा सकती हैं। उन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं होती क्योंकि वो पुरुषों की भाँति आत्मनिर्भर होना जानती है। मर्द खुद ही अपनी महत्वकांक्षा साधने की लालच में महिलाओं के काम में टांग अड़ाते हैं और इसे सामाजिकता का नाम दे देते है। आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसी सशक्त महिला शख्सियत से जिसने अपने बल बुते सफलता का नया इतिहास रचा है। और आज वो कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायक हो रही हैं।

जिम जॉइन करने से पहले की तस्वीर (अमीना अरशद)

मुम्बई की अमीना अरशद ने पुरुष प्रधान फिटनेस इंडस्ट्री में अपना खुद का जिम सेंटर खोला औऱ फिर अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय समाज में प्रायः महिलाएं अपने रिश्तों के लिए ही जीती है। समाज और रिश्तों का संतुष्टिकरण में ही उनकी उम्र गुजर जाती है और वो कभी भी आत्मनिर्भर नहीं हो पाती। शादी के बाद पति और बच्चे को संभालते-संभालते उम्र बीत जाता है। 50 की उम्र पार करते करते महिलाएं कमर दर्द, नस की समस्या, ब्लड प्रेशर, शुगर, डिप्रेशन आदि जैसे कई बीमारियों से जकड़ जाती हैं। ऐसे महिलाओं के लिए फिटनेस सपना बन जाता है

अमीना अरशद ऐसी ही पारिवारिक हालातों से गुजर कर उम्र से अधिक थकान का बसेरा बन गयी थी। फिर उन्होंने फिटनेस के लिए जिम जाने का निर्णय लिया। महिलाओं के जिम जाने का विरोध तो पुरुष प्रधान परिवार में अक्सर होता ही हैं। इनके साथ भी ऐसा ही हुआ। लेकिन बुलंद इरादों वाली अमीना ने हार नहीं मानी और जिम जॉइन कर ही ली। ज्यादातर लोग यह समझते हैं कि जिम जाने से सिर्फ शारीरिक बदलाव को ही महसूस किया जा सकता है लेकिन जिम का वर्क आउट आपके सोच-समझ को भी बदल देता है। यहां महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ जाता है। कठिन और लंबे समय तक किये गए वर्क आउट से आपकी उम्र 10-15 साल कम की तो दिखने ही लगती है साथ ही जो कॉन्फिडेंस बढ़ता है वह आत्मनिर्भर बनने तथा कुछ करने के लिए प्रेरित भी करता है।

अमीन अरशद ने आगे चलकर ‘स्लिम वे’ नाम से एक सेंटर खोला जहां महिलाएं ही प्रेक्टिस करती है। फिटनेस इंडस्ट्री का स्टार्टअप इन्हें कई महिलाओं के लिए रॉल मॉडल बना दिया है। आज इनके यहां से ट्रेनिंग लेकर कई महिलाएं अपना जिम सेंटर खोल चुकी है। अमीना अरशद का मानना है कि जो रिश्ते महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने से रोके उसे लांघना जरूरी होता है। जीवन को हमेशा झूठी शान के लिए नहीं जिया जा सकता है।

2 Replies to “केवल बच्चे ही पैदा नहीं करती बल्कि सफलता का संसार भी रचती हैं महिलाएं”

  1. Wow it’s amazing achievement for women as she has to be mother wife daughter and herself own self. Usually women fail to give justice to her own self. That’s the reason she is unable to give energy around her family members. It’s requires true courage to lift our own self.

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