कही ओवर कॉन्फिडेंस के शिकार तो नहीं रहती किरण बेदी!

आज जब पुडुचेरी में सियासी घमासान मचा हुआ है, कांग्रेस सरकार अल्पमत में है, परिस्थितियाँ भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है तथा पुडुचेरी विधानसभा के लिए अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे हालात में अमित शाह नहीं चाहते हैं कि किरण बेदी के किसी गलत निर्णय से पार्टी को किसी तरह की किरकिरी हो।  

देश की पहली महिला पुलिस अधिकारी के स्वविवेक पर  विश्वास कर जब-जब उन्हें कोई राजनीतिक दायित्व सौंपा गया तब-तब उनके ईगो के टकराव की खबरें आने लगी। उनके साथ जुड़कर काम करने वालों का मानना है कि किरण बेदी में परिस्थिति की वास्तविकता को भांपने और उसे हैंडल करने के बजाय हर परिस्थिति में अपनी बात मनवाने की आदत है। उनकी यह आदत उनके नेतृत्व क्षमता के नकारात्मक पक्ष को उजागर करती है। वो नेतृत्व नहीं करती है बल्कि ‘आदेश’ देती हैं और उसके पालन के तरीकों पर काम करती हैं। वो देश के राजनीति के मर्म को नहीं समझ पाती। लीडरशिप में हमेशा टकराव नहीं होता, न हमेशा अपनी बात मनवाने की जिद होती है। बल्कि टकराव और मतभेद की स्थिति में रास्ता निकालने की समझ होती है। यही कारण है कि आज जब पुडुचेरी में सियासी घमासान मचा हुआ है, कांग्रेस सरकार अल्पमत में है, परिस्थितियाँ भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है तथा पुडुचेरी विधानसभा के लिए अगले कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं, ऐसे हालात में अमित शाह नहीं चाहते हैं कि किरण बेदी के किसी गलत निर्णय से पार्टी को किसी तरह की किरकिरी हो। 

पुडुचेरी में जिस कदर राजनीतिक संकट है वैसे हालात में गवर्नर को प्रायः बदला नहीं जाता। लेकिन किरण बेदी को हटाया जा चुका है। दरअसल, मुख्यमंत्री वी नारायणसामी तथा किरण बेदी के बीच अक्सर टकराव की खबरें आती रही। मुख्यमंत्री लंबे समय से किरण बेदी को हटाने की मांग करते आ रहे है। इधर किरण बेदी ने मुख्यमंत्री पर हमेशा आरोप लगाया है कि वो लोकतांत्रिक तरीके से शासन नहीं कर रहे हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि किरण बेदी ने अपने पद की गरिमा के विपरीत विपक्षी पार्टी की भांति व्यवहार किया है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व भी इनसे नाराज चल रहा है।

पुडुचेरी में राजनीतिक संकट के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तत्काल प्रभाव से किरण बेदी को एलजी पद से हटाते हुए तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन को पुडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि किरण बेदी को ऐसे समय पर हटाया गया है जब केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में एक और कांग्रेस विधायक के इस्तीफे के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार विधानसभा में अपना बहुमत खो चुकि है। पुडुचेरी की 33 सदस्यीय विधानसभा में अब  कांग्रेस के पास मात्र 10 विधायक की शेष बचे हैं। सहयोगी द्रमुक के 3 एवं निर्दलीय सदस्य भी नारायणसामी की सरकार के समर्थन में हैं। जबकि विपक्ष के सदस्यों की संख्या भी 14 है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री वी नारायणसामी से इस्तीफा मांग रहे हैं। 

इससे पहले दिल्ली के 2015 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था। किरण बेदी बीजेपी की परंपरागत सीट कृष्णानगर से चुनावी लड़ी थीं जहां उनकी हार हुई थी। उस वक्त भी चुनाव प्रचार के दौरान इनसे दिल्ली भाजपा के कई वरिष्ठ नेता नाराज हो गए थे।

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