'वीमेन टू राइड'

आत्मबल से दूरियां लांघती बेटियां

घर की चौखट से घिरी सिसकती बेटियों से भले ही पुरुषवाद के अहंकार को संतुष्ट किया जा सके लेकिन जब उनके आत्मबल पर भरोसा कर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है तो वो दुनिया भर की दूरियों को लांघ देती है। पुरुषों की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी महिलाएं किसी भी क्षेत्र में कम नहीं है।


देश के लिए एक अच्छी खबर यह है कि पहली बार जम्मू की कुछ चट्टानी इरादों वाली बेटियों ने नारी सशक्तिकरण का सन्देश देने के लिए साइकिलिंग के जरिये अमृतसर की यात्रा की। जम्मू कश्मीर की महिला साइकलिंग क्लब ने जम्मू से अमृतसर की 216 किलोमीटर की यात्रा कर वीमेन डू राइड का जबरदस्त सन्देश दिया है। दरअसल, इस अभियान के जरिये इन बेटियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

वीमेन डू राइड’ इवेंट में महिलाओं के उत्साहवर्धन के लिए पुरुष सदस्यों ने भी भाग लिया


इस अभियान में पुरुषों के वर्चस्व वाले कई क्षेत्रों में अपना परचम लहरा चुकी बेटियों ने हिस्सा लिया। देश के चर्चित साहित्यकार पायल जैन ने ‘वीमेन डू राइड’ की संकल्पना की और इस पहल की अगुवाई की। उनके नेतृत्व में इसमे महिला शिक्षाविद, डॉ, व्यवसायी आदि ने हिस्सा लिया। इसमें डॉ रीतू अहल, रीना जैन, सोनिया साहनी, हरप्रीत भल्ला, मनप्रीत, सोनिया साहनी, अंजू गुप्ता ने भाग लिया। 19 मार्च को जम्मू के कुंजवानी चौक से इस अभियान की शुरुआत की गई जिसका समापन अमृतसर के गोल्डन गेट पर हुई। 


देश में यह अपने तरीके का पहला और अनोखा अभियान है जो सहज ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। प्रसिद्ध साहित्यकार पायल जैन बताती हैं कि महिला साइकलिंग क्लब की पहल इस बात का प्रतीक है कि देश की बेटियों के कदमों में अटूट साहस है, वो आत्मनिर्भर रहकर अपने जीवन को बेहतर कर सकती हैं। श्रीमती जैन को इस बात का संतोष है कि वो एक ऐसी टीम बना पाई जो एक परिवार की तरह लगे। एक टीम के रूप में किये गए हर प्रयास असरदायी होता है। हम सबने  महिलाओं की एक ऐसी टीम बनाई तो आत्मविश्वास से भरपूर तो है ही साथ में आपसी सामंजस्य बैठाने में भी सफल रही जिसके कारण घर के सदस्यों का भी भरपूर समर्थन मिला।

‘वीमेन डू राइड’ इवेंट महिलाओं की अस्मिता के महत्व को प्रदर्शित करती है


सोनिया साहनी ने ‘वीमेन डू राइड’ के प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि इस राइड ने महिलाओं को महिलाओं से जोड़ा है। यह राइड एक महिला को दूसरी महिला की परिस्थितियों के अनुसार उन्हें समझने का अवसर दिया है। अपने पति के साथ साइकलिंग कर रही डॉ रीतू अहल ने बताया कि इस इवेंट ने महिलाओं के आत्मविश्वास को, उनके अंदर के जज्बे को प्रदर्शित करने का अवसर दिया है। इस इवेंट से उत्साहित मनप्रीत ने इसे आत्मसम्मान का सफर बताया है। उन्होंने कहा कि हम सब यूं ही जीवन में कई यात्राऐं की हैं लेकिन वीमेन डू राइड का यह सफर आत्मसम्मान का सफर है। हरप्रीत भल्ला ने बताया कि इस राइड ने हम सबको उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का तरीका सीखाया है। हमे वैसा जीवन जीना चाहिए जिसमें लोगों के लिए कुछ न कुछ मैसेज हो। इस राइड ने हमें अपने घर के सदस्यों की नज़रों में सम्मानित भी किया है और घर के बाहर दुनिया की नज़रों में हमारी प्रतिभा को भी प्रस्तुत किया है।

रीना जैन ने कहा कि इस राइड ने हमारे व्यक्तित्व में बदलाव किया है। हर महिला के अंदर कुछ न कुछ खास है, कुछ प्रतिभा है। बस जरूरत है उसे समझने की।  सिंह सोनिया ने कहा कि हम महिलाओं के अंदर इतनी हिम्मत है कि हम दुनिया की हर दूरी को लांघ सकती हैं।

‘वीमेन टू राइड’ की संकल्पना की चर्चा अब राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है

 
शुरुआत में तो इस पहल को हल्के-फुलके ढंग से लिया गया। कई लोगों को इस लिए विश्वास नहीं हो पाया कि क्या महिलाएं वाकई में व्यस्त हाई वे पर साईकल चला पाएंगी! लोगों को लगता था कि जम्मू से अमृतसर की 216 किलोमीटर की लंबी दूरी साईकल से तय करना एक कठिन चुनौती है जिस के लिए कोई भी महिला शारीरिक तौर पर तैयार नहीं हो सकती हैं। साथ ही हाई वे पर साईकल चलना जोखिम भरा काम भी है। लेकिन आयोजक महिलाओं के  दृढ़ निश्चय से यह आयोजन अच्छे तरीके से संपन्न हो गया। प्रतिभागी महिलाओं को उनके घर से भी समर्थन मिलने लगा। पतियों ने अपनी पत्नियों के उत्साहवर्धन किया। साइकलिंग के वक्त गाड़ी  लेकर  हाई वे पर कवर करने लगे, बच्चे पानी, जूस को सर्व करने लगे। धीरे धीरे यह ट्रैवल सामाजिक भागीदारी के रूप में बदल गया। आपसी सहभागिता का आलम यह रहा कि इस राइड में दो पुरुषों ने भी भाग लिया। जिसमें एक डेंटल डॉ दम्पति ने भाग लिया। यह पहला मौका था जब जम्मू के डेंटल दम्पति डॉ रीतू अहल तथा डॉ राजेश अहल ने साइकलिंग की। 

‘वीमेन डू राइड’ इवेंट के तहत जम्मू से अमृतसर की 216 किलोमीटर की दूरी तय की गई


पायल जैन को इस बात का संतोष है कि ‘वीमेन डू राइड’ की संकल्पना ने महिला-पुरुष की आपसी सहभागिता को बढ़ावा दिया जिसका सुखद परिणाम यह हुआ कि इस महिला राइड को सुरक्षित और सफल बनाने में कई पुरुषों की अग्रणी भूमिका रही।  उन्होंने बताया कि KAS ऑफिसर सुखपाल सिंह, एडीशनल सेक्रेटरी जल शक्ति तथा डॉ राजेश अहल ने भी महिला सदस्यों के साथ साइकलिंग किया। इन सभी ने हर वक्त महिला सदस्यों का उत्साहवर्धन भी किया ताकि मंजिल तक पहुंचने के लिए उत्साह में कोई कमी न आ सके। 

 
इसी तरह उन्होंने गुरप्रीत सिंह (गैरी), हैप्पी जैन, संदीप साहनी, विपुल की भूमिका की भी बेहद सराहना की और कहा कि हम सभी ने मिलजुल कर टीम की भावना से काम किया तब जा कर यह इवेंट सफल हो सका। इस इवेंट का सबसे अनोखा पक्ष बच्चों की सक्रियता रही। सिद्धान्त, सांभव, तेजस, हरमहर और चित्तरूप की सक्रियता थकान को मिटाने वाली और मुस्कुराहट को लाने वाली रही। 


यह पहल सामाजिक पारिवारिक एकता का प्रतीक बन गया। अगर परिवार के हर सदस्य एक दूसरे के अस्मिता की परवाह करना शुरू कर दें तो वास्तव में समाज में सकारात्मक बदलाव हो सकेगा। इस राइड ने लोगों के बीच यह मैसेज दिया कि अगर परिवार में एक दूसरे को समझने की चलन हो तो सफर आसान हो सकता है।


साथ ही इस पहल का एक उद्देश्य यही भी है कि देश की सभी बेटियों को चाहे वो गांव की हो या शहरों सभी को समेकित रूप से सशक्तिकरण के प्रति जागरूक हो सके। हर महिलाओं को दूसरे महिला की ताकत बनना है। सभी बेटियां एक दूसरे को सपोर्ट करे। वीमेन डू राइड  अभियान ‘महिला ही महिला की दुश्मन है’ — के सिंद्धात को गलत साबित करते हुए ‘महिला ही महिला की ताकत है’ —  के सिद्धांत को प्रतिपादित करना चाहती है।

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